वागड़ की संस्कृति पहुंचेगी स्कूलों तक: 100 स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी वागड़ी लोककथाएं और मानगढ़ धाम की गाथा
वागड़ की संस्कृति पहुंचेगी स्कूलों तक राजस्थान सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत मानगढ़ धाम का इतिहास, वीरबाला कालीबाई की शहादत और बेणेश्वर मेले की परंपरा को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया है। डूंगरपुर और सिरोही के 100-100 स्कूलों में स्थानीय भाषा वागड़ी और गरासिया के गीत व लोककथाएं भी बच्चों को पढ़ाई जाएंगी। यह पहल न केवल बच्चों को अपने गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ेगी, बल्कि स्थानीय भाषाओं के संरक्षण में भी मील का पत्थर साबित होगी।
वागड़ की संस्कृति पहुंचेगी स्कूलों तक : मानगढ़ धाम का इतिहास अब बच्चों तक पहुंचेगा
राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SIERT) ने यह बड़ा कदम उठाया है।
अब कक्षा 5 की हमारा परिवेश पुस्तक में मानगढ़ धाम का इतिहास और गुरु गोविंद गुरु के योगदान की गाथा पढ़ाई जाएगी।
- मानगढ़ धाम आदिवासी क्रांति का प्रतीक है।
- यहां 1913 में गोविंद गुरु के नेतृत्व में आदिवासियों ने अंग्रेजों और रियासतों के खिलाफ संघर्ष किया।
- इस आंदोलन को आदिवासियों का जलियांवाला बाग भी कहा जाता है।
वागड़ की संस्कृति पहुंचेगी स्कूलों तक : कालीबाई की शहादत को मिलेगा स्थान
वीरबाला कालीबाई ने शिक्षा बचाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।
अब उनकी गाथा कक्षा 7 की “हमारा राजस्थान” पुस्तक में पढ़ाई जाएगी।
इस अध्याय में शामिल होंगे:
- कालीबाई की शहादत की कहानी।
- वागड़ के अन्य जननायक – भोगीलाल पंड्या, नानाभाई खाट, सेंगा भाई।
- आदिवासी अंचल में स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार आंदोलन का योगदान।
100 स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी वागड़ी लोककथाएं और मानगढ़ धाम की गाथा बेणेश्वर मेले की परंपरा भी पाठ्यक्रम में
कक्षा 6 की हमारा राजस्थान पुस्तक में बेणेश्वर मेले को शामिल किया गया है।
- इसे वागड़ का महाकुंभ कहा जाता है।
- यह मेला हर साल त्रिवेणी संगम पर लगता है।
- धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह आदिवासी समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
वागड़ी गीत और लोक कथाएं: 100 स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी
डूंगरपुर और सिरोही जिले के 100-100 स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाया जाएगा:
- वागड़ी भाषा के गीत।
- गरासिया भाषा की लोक कथाएं।
- स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी कहानियां।
यह प्रयास बच्चों को अपनी मूल पहचान से जोड़ने और स्थानीय भाषा को सहेजने की दिशा में अहम है।
वागड़ की संस्कृति पहुंचेगी स्कूलों तक: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का अस
नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत:
- स्थानीय भाषाओं में शिक्षा पर जोर।
- आदिवासी अंचलों की संस्कृति और इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करना।
- शिक्षकों के लिए स्थानीय भाषाओं का शब्दकोष तैयार करना।
अन्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अध्याय
- महाराणा प्रताप और राणा पूंजा की वीरता (कक्षा 4)।
- दानवीर भामाशाह और महाराणा कुंभा का योगदान।
- धरती राजस्थान की: त्यौहार और लोकनृत्य कविता के रूप में।
- मातृकुंडिया यात्रा और घूमर की परंपरा।
इस पहल से मिलने वाले फायदे
- बच्चों को अपने गौरवशाली इतिहास की सही जानकारी।
- आदिवासी समाज के नायकों की गाथा से नई पीढ़ी को प्रेरणा।
- स्थानीय भाषाओं और परंपराओं का संरक्षण।
- शिक्षा अधिक रोचक और व्यवहारिक होगी।
