सोने-चांदी में ऐतिहासिक: तेजी के बाद गिरावट का डर डूंगरपुर में त्योहारी सीजन में ग्राहकी ने पकड़ी रफ्तार
सोने-चांदी में ऐतिहासिक डूंगरपुर के सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है। बीते एक साल में सोना 77,583 से बढ़कर ₹1,26,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹98,000 से बढ़कर ₹1,62,500 प्रति किलो पहुंच गई है। रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास युद्ध, डॉलर की कमजोरी और मुद्रास्फीति के चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोना-चांदी को चुना है। विशेषज्ञों का कहना है — हर ऐतिहासिक तेजी के बाद गिरावट आती है, इसलिए निवेशक सावधानी बरतें। जानिए क्या है आगे का ट्रेंड और कब सस्ता हो सकता है सोना।
सोने-चांदी में ऐतिहासिक: सोने की कीमत में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी: निवेशकों के चेहरे खिले
सोने-चांदी में ऐतिहासिक डूंगरपुर में दशहरा और नवरात्र के साथ ही सर्राफा बाजार में रौनक लौट आई है।
बीते एक साल में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹77,583 से बढ़कर ₹1,26,000 प्रति 10 ग्राम तक जा पहुँची है — यानी लगभग 50% तक का रिटर्न।

इस तेज़ी ने न सिर्फ ज्वैलरी दुकानदारों को राहत दी है बल्कि निवेशकों को भी शानदार मुनाफा दिया है।
सोने-चांदी में ऐतिहासिक: चांदी ने भी तोड़ा रिकॉर्ड, 1.62 लाख प्रति किलो पहुंची कीमत
| वर्ष | चांदी के दाम (₹/किलो) |
|---|---|
| 1975 | 1,122 |
| 1985 | 3,955 |
| 1995 | 6,335 |
| 2005 | 10,675 |
| 2015 | 37,825 |
| 2020 | 63,435 |
| 2024 | 1,62,500 |
सोने-चांदी में ऐतिहासिक: इतिहास गवाह है कि चांदी ने हमेशा लंबी अवधि में शानदार रिटर्न दिया है।
पिछले एक वर्ष में यह ₹98,000 से बढ़कर ₹1,62,500 तक पहुंच चुकी है।

सोने-चांदी में ऐतिहासिक: क्यों बढ़ रहे हैं सोने-चांदी के दाम? जानिए चार बड़ी वजहें
- वैश्विक तनाव:
रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास युद्ध से आर्थिक अस्थिरता बढ़ी है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी। - केंद्रीय बैंकों की खरीदारी:
2024 में कई देशों के सेंट्रल बैंकों ने बड़ी मात्रा में सोना खरीदा। 2025 में भी यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है। - अमेरिकी डॉलर में कमजोरी:
डॉलर कमजोर होने पर सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं, क्योंकि निवेशक इसे सुरक्षित विकल्प मानते हैं। - मुद्रास्फीति और शेयर बाजार की अस्थिरता:
महंगाई और शेयर बाजार में गिरावट ने निवेशकों को सोने-चांदी की ओर आकर्षित किया है।
सोने-चांदी में ऐतिहासिक: इतिहास बताता है — हर तेजी के बाद आती है गिरावट
| वर्ष | वृद्धि (%) | गिरावट (%) |
|---|---|---|
| 1979 | +125% | 1980 में -55% |
| 2008–2011 | +160% | 2013 तक -35% |
| 2020 | +37% | 2022 तक -15% |
विशेषज्ञों का कहना है कि यह “History Repeats Itself” वाला दौर है।
जब भी सोना अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा, कुछ महीनों बाद बड़ी गिरावट देखने को मिली।

सोने-चांदी में ऐतिहासिक: डूंगरपुर के ज्वैलर्स क्या कह रहे हैं?
“लोग अपनी जरूरत के हिसाब से सोना-चांदी खरीद रहे हैं। निवेशक थोड़े रुककर खरीदारी करें — 4-5 महीनों में दाम स्थिर हो सकते हैं।”
— नितिन शाह, हीरालाल केसरीमल फर्म
“सोने का भाव डेढ़ लाख और चांदी दो लाख के पार जा सकती है। त्यौहारों में खरीदारी चरम पर है।”
— रियांक शाह, गहना ज्वैलर्स
“लोगों ने पहले इंतजार किया, अब बढ़ते दामों के डर से खरीदारी शुरू कर दी है।”
— गिरीश पंचाल, डूंगरपुर ज्वैलर्स
“कोरोना के बाद पहली बार दशहरा पर धनतेरस जैसी ग्राहकी देखी गई।”
— सावन सरैया, सावन गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड, ठाकरड़ा
निवेशकों के लिए सुझाव: कब खरीदें और कब रुकें?
अगर आप दीर्घकालिक निवेशक हैं, तो अभी का समय सोना-चांदी में धीरे-धीरे एंट्री लेने का है।
लेकिन अगर आप अल्पकालिक मुनाफे के लिए खरीद रहे हैं, तो थोड़ा इंतजार करें — अगले कुछ महीनों में दाम स्थिर या थोड़ा कम हो सकते हैं।
शादियों का सीजन फिलहाल बाजार को मजबूत बनाए हुए है, लेकिन जनवरी 2025 के बाद रेट में सुधार की संभावना जताई जा रही है।
FAQs: सोना-चांदी के दाम और निवेश से जुड़े सवाल
Q1. क्या 2025 में सोने की कीमतें और बढ़ेंगी?
हां, विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक तनाव और मुद्रास्फीति बनी रही तो सोने का भाव ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
Q2. क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?
शादी या त्योहार के लिए हां, लेकिन निवेश के लिए थोड़ा इंतजार बेहतर रहेगा क्योंकि कुछ महीनों में सुधार आ सकता है।
Q3. चांदी में निवेश करना बेहतर है या सोने में?
चांदी का औद्योगिक उपयोग बढ़ने से इसमें लंबी अवधि का फायदा संभव है, जबकि सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है।
Q4. क्या डॉलर में गिरावट से भारतीय बाजार में सोना सस्ता होगा?
नहीं, डॉलर कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ती है, जिससे भारत में भी दाम चढ़ते हैं।
Q5. क्या 2025 में सोना फिर गिर सकता है?
इतिहास यही बताता है कि हर उछाल के बाद गिरावट आती है, इसलिए निवेशकों को सावधानीपूर्वक निर्णय लेना चाहिए।
निष्कर्ष: अभी सावधानी से करें निवेश, त्योहारी ग्राहकी बनी रहेगी
डूंगरपुर समेत पूरे देश में सोना-चांदी की चमक फिलहाल बरकरार है।
त्योहारी सीजन और शादियों की वजह से ग्राहकी में तेजी है, लेकिन इतिहास कहता है — हर रिकॉर्ड के बाद ठहराव जरूर आता है।
