परम पूज्य श्री श्री 1008 : महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज का डूंगरपुर आगमन, पूनम के दिन शिव कृपा से सजा पावन क्षण
परम पूज्य श्री श्री 1008 : परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महर्षि भृगु पीठाधीश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज का 3 जनवरी को डूंगरपुर आगमन सनातन समाज के लिए अत्यंत गौरव और श्रद्धा का विषय बना। भारतीय सर्वधर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक एवं राष्ट्रीय श्री रामलीला शोध संस्थान के संस्थापक आचार्य के रूप में गुरुदेव का डूंगरपुर सभापति श्री अमृतलाल कलासुआ जी के निवास पर आगमन एक दिव्य संयोग रहा। पूनम के पावन दिन शिवजी की विशेष कृपा से श्रीमती हेमलताबेन कलाल एवं श्री हेमंत कलाल को गुरुदेव के चरणों का अभिषेक करने का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह क्षण न केवल धार्मिक था, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज का परिचय
परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज सनातन संस्कृति के ऐसे आचार्य हैं, जिनका जीवन सेवा, साधना और सर्वधर्म समभाव को समर्पित है।
वे—
- भारतीय सर्वधर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक
- राष्ट्रीय श्री रामलीला शोध संस्थान के संस्थापक आचार्य
- देश-विदेश में सनातन चेतना के प्रेरणास्रोत
उनकी वाणी और सान्निध्य समाज को जोड़ने का कार्य करता है।
परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज का 3 जनवरी को डूंगरपुर आगमन
3 जनवरी को डूंगरपुर की धरती पर आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष संचार देखने को मिला।
गुरुदेव का आगमन केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए ईश्वरीय अनुकंपा जैसा अनुभव रहा।
डूंगरपुर शहर में इस आगमन को लेकर श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का वातावरण बना रहा।

परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज का सभापति अमृतलाल कलासुआ जी के निवास पर पधारना (विशेष आकर्षण)
3 जनवरी का दिन डूंगरपुर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय बन गया, जब परम पूज्य गुरुदेव डूंगरपुर सभापति श्री अमृतलाल कलासुआ जी के निवास पर पधारे।
गृह आंगन में गुरुदेव के पावन चरणों का पदार्पण होना स्वयं में पुण्य और सौभाग्य का प्रतीक था।
इस पावन अवसर पर श्रीमती हेमलताबेन कलाल एवं श्री हेमंत कलाल को गुरुदेव के पवित्र चरणों का विधिवत अभिषेक करने का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ।
परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज के चरणों का अभिषेक: पूनम के दिन शिव कृपा का दिव्य संयोग
यह क्षण साधारण नहीं था।
पूनम के पावन दिवस पर शिवजी की विशेष कृपा से यह अभिषेक एक आध्यात्मिक अनुभव में परिवर्तित हो गया।
इस दिव्य क्षण की विशेषताएं:
- पूनम का शुभ योग
- शिव कृपा का विशेष संयोग
- गुरुदेव के चरणों का अभिषेक
- परिवार और समाज के लिए मंगल आशीर्वाद
उपस्थित सभी श्रद्धालुओं की आंखों में भावुकता और हृदय में श्रद्धा स्पष्ट दिखाई दी।

परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज का संदेश
गुरुदेव का जीवन यह सिखाता है कि—
“धर्म दिखावे का नहीं, आचरण का विषय है।”
उनका संदेश समाज को जोड़ने, संस्कारों को जीवित रखने और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ाने का मार्ग दिखाता है।
परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज के दर्शन हेतु सर्व समाज से निवेदन
समस्त सनातनी धर्म प्रेमी, समाज के प्रबुद्धजन एवं श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह है कि—
- अधिक से अधिक संख्या में पधारें
- पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करें
- इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर का पुण्य लाभ लें
यह अवसर जीवन में बार-बार नहीं आता।
कार्यक्रम से जुड़ी मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तिथि | 3 जनवरी |
| अवसर | गुरुदेव का आगमन |
| स्थान | डूंगरपुर |
| विशेष स्थल | निवास – सभापति अमृतलाल कलासुआ जी |
| विशेष दिन | पूनम |
FAQs (यूज़र इंटेंट कवर)
परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज डूंगरपुर कब पधारे?
3 जनवरी को गुरुदेव का डूंगरपुर आगमन हुआ।
गुरुदेव का चरणों का अभिषेक किसने किया?
श्रीमती हेमलताबेन कलाल एवं श्री हेमंत कलाल ने।
यह अवसर क्यों विशेष माना जा रहा है?
पूनम के दिन शिव कृपा और गुरुदेव का सान्निध्य दुर्लभ संयोग है।
गुरुदेव किस संस्था से जुड़े हैं?
वे भारतीय सर्वधर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक हैं।
क्या आम श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं?
हां, समस्त समाज को आमंत्रित किया गया है।
निष्कर्ष
परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज का डूंगरपुर आगमन केवल समाचार नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कार और सनातन चेतना का उत्सव है।
यह क्षण डूंगरपुर के लिए गर्व और पुण्य का विषय बन गया।
जय सनातन | जय शिव | जय धर्म
