डूंगरपुर में बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस: सीएम भजनलाल का आगमन और राष्ट्रभक्ति मिशन की अनोखी पहल
डूंगरपुर में बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस पर सीएम भजनलाल शर्मा पहुंचे, जहाँ राष्ट्रभक्ति मिशन के तहत हेमंत कलाल और हेमलता कलाल ने दो दिवसीय जल-अन्न त्याग अनशन रखा। राष्ट्रभक्ति चोला पहनकर प्रधानमंत्री के मिशनों को शक्ति स्वरूप प्रस्तुत करने की उनकी पहल ने पूरे कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया। उनकी इस भावना से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंच से उतरकर उनके पास आए और अपने हाथों से जल पिलाकर अनशन तुड़वाया। इस संवेदनशील क्षण को उपस्थित लोगों ने मां गंगा का आशीर्वाद माना। कार्यक्रम में जनजातीय समाज, युवाओं और स्थानीय नागरिकों का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। यह रिपोर्ट पढ़ें और जानें कि कैसे डूंगरपुर ने जनजातीय चेतना और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखा।

डूंगरपुर में बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस पर सीएम भजनलाल का आगमन
डूंगरपुर में मंगलवार को आयोजित बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस इस बार कई मायनों में खास रहा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूरे सम्मान और आदर के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जहाँ जनजातीय समाज और युवा पीढ़ी भारी संख्या में मौजूद थे।
छोटे-छोटे समूहों में खड़े लोग पारंपरिक वाद्यों की थाप पर स्वागत कर रहे थे। माहौल में एक अलग ही ऊर्जा थी — मानो जनजातीय गौरव, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति एक साथ जीवंत हो उठे हों।

डूंगरपुर में बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस और राष्ट्रभक्ति मिशन की अनोखी पहल
इस कार्यक्रम का सबसे प्रेरक पल वह रहा जब हेमंत कलाल और हेमलता कलाल ने अपनी अनूठी राष्ट्रभक्ति पहल से सबका ध्यान खींचा।
मुख्य आकर्षण – राष्ट्रभक्ति चोला और दो दिवसीय अनशन
दोनों ने
- राष्ट्रभक्ति चोला धारण किया
- दो दिन तक जल-अन्न त्याग संकल्प रखा
- और “मिशन सिंदूर” व प्रधानमंत्री द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्र अभियानों को शक्ति स्वरूप प्रस्तुत किया
उनका उद्देश्य एक ही था —
राष्ट्रभक्ति को कर्म से साबित करना और युवा पीढ़ी को भी जागरूक करना।

डूंगरपुर में बिरसा मुंडा दिवस – मुख्यमंत्री ने स्वयं हाथों से पिलाया जल
कार्यक्रम का सबसे भावुक और यादगार पल तब आया, जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भीड़ के बीच उतरकर हेमंत और हेमलता तक पहुँचे।
गंगा समान क्षण — मुख्यमंत्री द्वारा जल ग्रहण
मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से एक लोटा जल पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।
यह दृश्य कुछ क्षणों के लिए पूरे कार्यक्रम का केंद्र बन गया।
लोगों ने इसे “मां गंगा का आशीर्वाद” कहा, क्योंकि यह दृश्य न सिर्फ संवेदनशील था, बल्कि भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों को भी दर्शाता था।

डूंगरपुर में बिरसा मुंडा जागरण दिवस – कार्यक्रम की मुख्य झलकें
डूंगरपुर में बिरसा मुंडा : मुख्य Highlights (Bullet Format)
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भव्य स्वागत
- जनजातीय समाज की बड़ी भागीदारी
- राष्ट्रभक्ति मिशन की अनोखी प्रस्तुति
- दो दिवसीय जल-अन्न त्याग अनशन
- मुख्यमंत्री द्वारा भावुक क्षण में जल पिलाना
- युवाओं में उत्साह और देशभक्ति का संदेश

डूंगरपुर में बिरसा मुंडा दिवस – कार्यक्रम सारणी (Table)
| गतिविधि | विवरण |
|---|---|
| दिवस | बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस |
| स्थान | डूंगरपुर |
| मुख्य अतिथि | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा |
| प्रमुख पहल | राष्ट्रभक्ति चोला, दो दिवसीय अनशन |
| विशेष क्षण | मुख्यमंत्री द्वारा जल ग्रहण कराना |
डूंगरपुर में बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस – जनभावना और उत्साह
डूंगरपुर में बिरसा मुंडा : डूंगरपुर के स्थानीय नागरिकों, युवाओं और जनजातीय समाज में इस कार्यक्रम को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिला।
हर किसी के चेहरे पर गर्व था कि इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति एक ही मंच पर दिखाई दे रही थी।
लोगों ने इसे जनजातीय चेतना के पुनर्जागरण की दिशा में बड़ा कदम माना।

FAQs – डूंगरपुर में बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस
Q1. डूंगरपुर में बिरसा मुंडा जनजाति जागरण दिवस का मुख्य आकर्षण क्या रहा?
इस वर्ष का सबसे बड़ा आकर्षण था हेमंत और हेमलता कलाल का राष्ट्रभक्ति मिशन, जिसके तहत उन्होंने दो दिवसीय अनशन रखा और मुख्यमंत्री ने स्वयं उन्हें जल पिलाया।
Q2. सीएम भजनलाल के आगमन से कार्यक्रम में क्या विशेषता जुड़ी?
मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने आयोजन को राज्यस्तरीय महत्व दिया और उनके भावुक कदम ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
Q3. राष्ट्रभक्ति चोला की प्रेरणा क्या थी?
यह राष्ट्रभक्ति और प्रधानमंत्री मिशनों को शक्ति स्वरूप प्रदर्शित करने का संदेश था, जिसे हेमंत व हेमलता ने अपने संकल्प से प्रस्तुत किया।
Q4. क्या यह आयोजन हर वर्ष होता है?
हाँ, बिरसा मुंडा जागरण दिवस हर वर्ष मनाया जाता है और जनजातीय समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
Q5. क्या युवा इस आयोजन से प्रेरित होते हैं?
हाँ, इस कार्यक्रम में देशभक्ति, संस्कृति और जनजातीय गौरव के संदेशों से युवाओं में सकारात्मक प्रेरणा फैलती है।
