बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों की गाड़ियां रोकीं: डूंगरपुर जिला अस्पताल में पार्किंग ठेके को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है और अब यह मुद्दा प्रशासन से निकलकर सियासी बहस का रूप ले चुका है। सोमवार को भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत अपने समर्थकों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और अस्पताल गेट पर निकल रही भाजपा नेताओं, अधिकारियों और डॉक्टरों की गाड़ियों को रोक दिया। इस दौरान सभी वाहनों से पार्किंग की रसीद कटवाई गई, जिसके बाद ही उन्हें आगे जाने दिया गया।
बीएपी का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों और उनके परिजनों से जबरन पार्किंग शुल्क वसूल रहा है, जबकि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की गाड़ियों से शुल्क नहीं लिया जाता। पार्टी का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह भेदभावपूर्ण है और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। इसी भेदभाव के विरोध में बीएपी कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से सभी की पार्किंग रसीद कटवाई।
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : बीएपी जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत ने इस पूरे मामले को किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने मांग की कि जिला अस्पताल में पार्किंग का ठेका तुरंत रद्द कर निशुल्क पार्किंग व्यवस्था लागू की जाए, ताकि इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके। वहीं दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पार्किंग ठेका सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार दिया गया है और इसका उद्देश्य अस्पताल परिसर में अव्यवस्था रोकना तथा एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को सुचारु रखना है।
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : इस घटनाक्रम के बाद डूंगरपुर जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल मच गई है। एक ओर जनहित और गरीब मरीजों की परेशानी का मुद्दा उठाया जा रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने की मजबूरी गिना रहा है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस विवाद का क्या समाधान निकालता है और आम जनता को कब राहत मिलती है।

बीएपी जिलाध्यक्ष ने गेट पर रोकी गाड़ियां, कटवाई पार्किंग रसीद
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : डूंगरपुर जिला अस्पताल सोमवार को अचानक सियासी अखाड़ा बन गया।
बीएपी जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत अपने समर्थकों के साथ अस्पताल गेट पर पहुंच गए और वहां से निकल रही गाड़ियों को रोकना शुरू कर दिया।
इस दौरान भाजपा नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और अस्पताल स्टाफ की गाड़ियों से जबरन पार्किंग रसीद कटवाई गई। बीएपी कार्यकर्ताओं का कहना था कि अगर गरीब मरीजों से शुल्क लिया जा रहा है, तो नेताओं और अधिकारियों को भी छूट नहीं मिलनी चाहिए।

बीएपी जिलाध्यक्ष का आरोप: गरीबों से वसूली, नेताओं को राहत
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : बीएपी जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला किसी पार्टी विशेष का नहीं, बल्कि जनहित का है।
उनका आरोप है कि जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीज और उनके परिजन मजबूरी में पार्किंग शुल्क दे रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि—
- जब मरीजों से शुल्क लिया जा सकता है
- तो फिर नेताओं, अधिकारियों और डॉक्टरों की गाड़ियों से शुल्क क्यों नहीं?
इसी सवाल को उठाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से सभी की रसीद कटवाई गई।
बीएपी जिलाध्यक्ष ने पहले भी दिया था धरना
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : यह पहली बार नहीं है जब जिला अस्पताल पार्किंग ठेका विवादों में आया हो।
इससे पहले चौरासी विधायक अनिल कटारा और बीएपी जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत के नेतृत्व में अस्पताल परिसर में धरना दिया गया था।

धरने के दौरान दी गई चेतावनी
- 3 दिन में पार्किंग ठेका रद्द करने की मांग
- अस्पताल में निशुल्क पार्किंग लागू करने की चेतावनी
इसके बाद करीब 5 दिनों तक पार्किंग शुल्क नहीं लिया गया, जिससे मरीजों को राहत मिली।
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : बीएपी जिलाध्यक्ष फिर क्यों पहुंचे अस्पताल?
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : रविवार को दोबारा पार्किंग शुल्क शुरू होने की सूचना मिलते ही बीएपी जिलाध्यक्ष सोमवार को फिर अस्पताल पहुंचे।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी सार्वजनिक सूचना के फिर से शुल्क लेना शुरू कर दिया।
इसके विरोध में बीएपी कार्यकर्ताओं ने:
- डॉक्टरों
- अस्पताल स्टाफ
- नेताओं और अधिकारियों
सभी की गाड़ियों की पार्किंग रसीद कटवाई।
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : भाजपा नेताओं की गाड़ियां भी रोकी गईं
इस दौरान जिला स्तरीय आरोग्य शिविर से लौट रहे कई बड़े भाजपा नेताओं की गाड़ियां भी रोकी गईं, जिनमें शामिल थे:
- भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष हकरू मईड़ा
- पूर्व सांसद कनकमल कटारा
- नगर परिषद सभापति अमृतलाल कलासुआ
- उपसभापति सुदर्शन जैन
- सीएमएचओ डॉ. अलंकार गुप्ता
सभी की गाड़ियों से पार्किंग रसीद कटवाने के बाद ही आगे जाने दिया गया।
अस्पताल प्रशासन की सफाई: ठेका नियमों के तहत
अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेंद्र डामोर ने पूरे मामले पर प्रशासन का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में अव्यवस्थित पार्किंग के कारण एंबुलेंस तक को रास्ता नहीं मिल पाता था।
अस्पताल प्रशासन के तर्क
- लोग वाहन इधर-उधर खड़े कर देते हैं
- एंबुलेंस और इमरजेंसी सेवाओं में बाधा आती है
- सरकारी नियमों के तहत पार्किंग ठेका दिया गया है
- 4 दिन पार्किंग फ्री रहने पर अस्पताल में अव्यवस्था फैल गई
उनका कहना है कि यह निर्णय अस्पताल का नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों के अनुसार लिया गया है।
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : डूंगरपुर बनाम अन्य जिले: बीएपी का बड़ा सवाल
बीएपी जिलाध्यक्ष ने प्रशासन से सीधा सवाल किया कि:
- जब उदयपुर और प्रतापगढ़ जिलों में अस्पतालों में पार्किंग शुल्क नहीं लिया जा रहा
- तो फिर डूंगरपुर में ही क्यों गरीब मरीजों से वसूली की जा रही है?
उन्होंने इसे प्रशासन की दोहरी नीति बताते हुए ठेका रद्द करने की मांग दोहराई।
जिला अस्पताल पार्किंग विवाद: आगे क्या?
बीएपी जिलाध्यक्ष ने भाजपा नेताओं व डॉक्टरों : फिलहाल मामला शांत जरूर हुआ है, लेकिन समाधान नहीं निकला है।
अगर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच सहमति नहीं बनती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।
बीएपी ने साफ कर दिया है कि:
- जब तक गरीब मरीजों को राहत नहीं मिलेगी
- तब तक आंदोलन जारी रहेगा
FAQs: जिला अस्पताल पार्किंग विवाद
बीएपी ने पार्किंग रसीद क्यों कटवाई?
गरीब मरीजों से शुल्क वसूली का विरोध जताने के लिए।
अस्पताल प्रशासन पार्किंग ठेके का समर्थन क्यों कर रहा है?
प्रशासन के अनुसार इससे अव्यवस्था कम होती है और एंबुलेंस को रास्ता मिलता है।
क्या पार्किंग शुल्क फिलहाल लिया जा रहा है?
हां, रविवार से दोबारा शुल्क शुरू किया गया है।
क्या ठेका रद्द हो सकता है?
यह प्रशासन और सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा।
यह मामला राजनीतिक है या जनहित का?
बीएपी इसे जनहित का मुद्दा बता रही है, जबकि प्रशासन इसे व्यवस्था से जुड़ा मामला मानता है।
