मानगढ़ धाम का इतिहास हटाया: चौथी कक्षा की किताब से अंग्रेजों के नरसंहार और 2500 शहीद आदिवासियों की गाथा गायब
मानगढ़ धाम का इतिहास हटाया राजस्थान शिक्षा विभाग ने बड़ा बदलाव करते हुए चौथी कक्षा की अंग्रेजी किताब से मानगढ़ धाम का इतिहास हटा दिया है। इस पाठ में 1913 में अंग्रेजों द्वारा किए गए नरसंहार और 2500 से ज्यादा आदिवासी शहीदों की गाथा शामिल थी। संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में हुआ यह आंदोलन राजस्थान का जलियांवाला बाग कांड कहा जाता है। अब इसकी जगह “छोटे सपने देखने वाले” नाम का नया पाठ जोड़ा गया है। शिक्षा नीति के इस बदलाव से आदिवासी समाज में नाराज़गी भी देखी जा रही है। आखिर क्यों हटाया गया मानगढ़ धाम का इतिहास और नया पाठ किस बारे में है? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मानगढ़ धाम का इतिहास हटाया: क्या है मामला
राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, उदयपुर ने इस बार चौथी कक्षा की अंग्रेजी किताब में बड़ा बदलाव किया है।
- पहले इसमें मानगढ़ धाम नाम से पाठ शामिल था।
- लेकिन अब यह अध्याय हटा दिया गया है।
- इसकी जगह छोटे सपने देखने वाले नामक नया पाठ जोड़ा गया है।
मानगढ़ धाम का इतिहास हटाया: क्या था इस पाठ में
मानगढ़ धाम का पाठ (पेज 88 से 96) 1913 के आदिवासी विद्रोह पर आधारित था। इसमें बताया गया था कि—
- 17 नवंबर 1913 को संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में आदिवासी मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्र हुए।
- अंग्रेजों ने इसे विद्रोह मानते हुए हमला किया।
- मेजर बेली और कैप्टन स्टाइली के आदेश पर तोप और बंदूकों से गोलियां बरसाई गईं।
- करीब 2500 आदिवासी शहीद हो गए।
- गोविंद गुरु को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, 1919 में वे रिहा हुए लेकिन निर्वासित रहे।
इस घटना को राजस्थान का जलियांवाला बाग हत्याकांड भी कहा जाता है।
मानगढ़ धाम का इतिहास हटाया: नया पाठ शामिल किया गया
हटाए गए पाठ की जगह अब “छोटे सपने देखने वाले” नामक कविता शामिल की गई है।
इसमें एक बच्चे की कल्पना को दर्शाया गया है—
- नदियां सपनों की दुनिया में बहती हैं।
- पहाड़ चमकते हैं।
- जानवर बातें करते हैं और तारे गीत गाते हैं।
- बच्चा तितली के पंखों से उड़कर इंद्रधनुष से रंग लेता है और बादलों को रंग देता है।
मानगढ़ धाम का इतिहास हटाया: शिक्षा नीति के तहत बदलाव
- पहली से 5वीं तक के पाठ्यक्रम में नए बदलाव किए गए हैं।
- डूंगरपुर की पहली शहीद बालिका कालीबाई का पाठ भी हटा दिया गया।
- नई शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है।
मानगढ़ धाम का इतिहास हटाया: आदिवासी समाज की नाराज़गी
मानगढ़ धाम आदिवासी समाज की आस्था और शौर्य का प्रतीक है।
- यहां हर साल माघ पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि दी जाती है।
- आदिवासी समाज का कहना है कि बच्चों को अपने शहीदों और इतिहास से परिचित कराना जरूरी है।
- पाठ हटाने के फैसले से समाज में असंतोष देखा जा रहा है।
मानगढ़ धाम का इतिहास हटाया: मुख्य बिंदु (टेबल
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| हटाया गया पाठ | मानगढ़ धाम (पेज 88–96) |
| शहीद हुए आदिवासी | 2500 से अधिक |
| घटना की तारीख | 17 नवंबर 1913 |
| नेतृत्व किया | संत गोविंद गुरु |
| नया जोड़ा गया पाठ | छोटे सपने देखने वाले |
| शिक्षा नीति के बदलाव | पहली से 5वीं तक नए पाठ्यक्रम लागू |
