डूंगरपुर में विश्व आदिवासी दिवस: संस्कृति और परंपराओं को बचाने का गूंजा संदेश, जय जोहार से गूंजा मैदान
डूंगरपुर में विश्व आदिवासी दिवस 2025 बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। आदिवासी परिवार और भारत आदिवासी पार्टी द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में हजारों लोग पारंपरिक पहनावे में पहुंचे। रैली, गैर नृत्य और रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा का सशक्त संदेश दिया गया। जय जोहार के नारों से गूंजते स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में वक्ताओं ने संविधान में आदिवासियों को मिले अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और एकजुटता की अपील की। यह आयोजन न सिर्फ संस्कृति का उत्सव था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रेरक मंच भी बना।
डूंगरपुर में विश्व आदिवासी दिवस :विश्व आदिवासी दिवस डूंगरपुर में – परंपरा, संस्कृति और एकजुटता का संगम
डूंगरपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में विश्व आदिवासी दिवस 2025 का नजारा बेहद भव्य और रंगीन था। सुबह से ही आदिवासी परिवारों का आना शुरू हो गया था।
- युवक – सफेद धोती, कुर्ता, माथे पर साफा, गोफन और मोर पंख के साथ
- महिलाएं – पारंपरिक ओढ़नी, घाघरा और चांदी के जेवरात में
- बच्चे – रंग-बिरंगे परिधानों में उत्साह से लबरेज़
दोपहर तक हजारों की भीड़ जय जोहार के नारों और डीजे की धुनों के साथ मैदान में पहुंच चुकी थी।
विश्व आदिवासी दिवस डूंगरपुर – रैली से सांस्कृतिक कार्यक्रम तक
मुख्य आकर्षण
- पारंपरिक रैली – गांव-गांव से आए लोग सजावट किए वाहनों और पैदल रैली में पहुंचे।
- गैर नृत्य – स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक गैर नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी।
- रंगारंग कार्यक्रम – गीत, नाटक और नृत्य में आदिवासी रीति-रिवाजों की झलक।
| कार्यक्रम | समय | विशेष आकर्षण |
|---|---|---|
| रैली आगमन | सुबह 10 बजे | पारंपरिक वाद्य यंत्र, नृत्य |
| दीप प्रज्वलन | सुबह 11 बजे | महापुरुषों की तस्वीरों के सामने |
| सांस्कृतिक प्रस्तुति | दोपहर 12 बजे | गीत, गैर नृत्य, नाटक |
| संबोधन | दोपहर 1 बजे | आदिवासी अधिकारों पर चर्चा |
विश्व आदिवासी दिवस डूंगरपुर – अधिकार और चुनौतियां
कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज को संविधान में दिए गए अधिकारों और उनके महत्व पर जोर दिया।
- जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा
- परंपराओं और भाषा का संरक्षण
- शिक्षा और रोजगार के अवसर
- समाज की एकजुटता
राजनीतिक संदेश भी पहुंचे
डूंगरपुर-बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने अपने संबोधन में कहा:
“सरकारें केवल वोट बैंक की राजनीति न करें, बल्कि आदिवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।”
उन्होंने एआई टेक्नोलॉजी के जरिए आदिवासी परंपरा और संस्कृति के संरक्षण की संभावनाओं पर भी बात की।
विश्व आदिवासी दिवस डूंगरपुर – क्यों खास है यह दिन?
- आदिवासी संस्कृति को बचाने का संकल्प
- नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का अवसर
- सामाजिक और राजनीतिक एकजुटता का मंच
इवेंट से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- स्थान: स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, डूंगरपुर
- मुख्य आयोजक: आदिवासी परिवार, भारत आदिवासी पार्टी
- विशेषताएं: रैली, गैर नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- संदेश: संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा
